Monday, July 7, 2008

रुत आई पीले फूलों की, तुम याद आए

कोई बीसेक साल पहले ग़ुलाम अली और आशा भोंसले ने मिल जुल कर मेराज़-ए-ग़ज़ल नाम से एक बेहतरीन अल्बम जारी किया था. यह आज भी मेरे सर्वकालीन प्रियतम संग्रहों में है. उसी से सुनिए यह कम्पोज़ीशन:


फिर सावन रुत की पवन चली, तुम याद आए
फिर पत्तों की पाज़ेब बजी, तुम याद आए

फ़िर कंजें बोलीं घास के हर समुन्दर में
रुत आई पीले फूलों की, तुम याद आए

फिर कागा बोला घर के सूने आंगन में
फिर अमृत रस की बूंद पड़ी, तुम याद आए



(आभार: विनय)

3 comments:

मीत said...

अशोक भाई, फ़िलहाल दफ्तर में हूँ, सुन नहीं सकता, लेकिन मेराज-ए-ग़ज़ल मेरी भी पसंदीदा albums में से एक है. इसी album की एक और कमाल की ग़ज़ल मैं भी पोस्ट करने की सोच रहा था. बहुत उम्दा प्रस्तुति.

RA said...

Evergreen track!Thanks.
कृपया कवि का नाम भी बतायें |

Lavanyam - Antarman said...

बहुत पसँद आया गीत अशोक जी ..
बेहतरीन ...मौज मेँ थिरकता हुआ !
- लावण्या