Saturday, September 6, 2008

तरसत जियरा हमार नैहर में ....

दोस्तो मुझे बस एक बात मालूम है इस पोस्ट के बारे में : ये आवाज़ शोभा गुर्टू की है.

इस लिए कुछ कहूँगा नहीं, मैं इस क़ाबिल ही नहीं. मैं पहले ही अर्ज़ कर चुका हूँ कि संगीत का इल्म मुझे रत्ती भर नहीं. बस नशा है .... इस के बिना जिया नहीं जाता ....

लेकिन क्या है ये जो छोड़ता नहीं मुझे ....




7 comments:

Manoshi said...

शुक्रिया । ऐसे ब्लाग की कमी थी।

sidheshwer said...

और कुछ जानने की जरूरत भी क्या है दोस्त !
बस सुनें और गुनें

ललितमोहन त्रिवेदी said...

मीत जी ! शोभा गुर्टू का दादरा बहुत मनभावन है और उतना ही मनभावन है आपका ये ब्लॉग ! सराबोर कर दिया आपने !संगीत मेरी भी कमजोरी है ! बहुत उम्दा काम कर रहे हैं आप !
मेरी ग़ज़ल पर टिप्पणी के लिए धन्यवाद !

जितेन्द़ भगत said...

मैं PC पर काम करते हुए ब्‍लॉग देख रहा था कि‍ तब आपके ब्‍लाग पर ये गीत सुनकर मगन हो गया। बहुत-बहुत शुक्रि‍या।

Udan Tashtari said...

बहुत आभार इस प्रस्तुति का-आनन्द आ गया सुनकर.


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-समीर लाल
-उड़न तश्तरी

ravi shekhar said...

ब्लॉग जीवन में एक कमी थी - अपने पूरी कर दी -वाह!

महेन said...

मीत भाई, इतनी जानकारी क्या काफ़ी नहीं है? सुनिये और सुनाइये बस।