Thursday, September 20, 2012

प्यास बुझे और प्यास न जाए



नौशाद द्वारा प्रस्तुत गणेश बिहारी ‘तर्ज़’ की ग़ज़लों के अलबम ‘तर्ज़’ की आखिरी प्रस्तुति है यह. ललित सेन के संगीत निर्देशन में शोभा गुर्टू –





रह गए आंसू, नैन बिछाए
घन आए घनस्याम न आए

दिल तो जैसे तैसे संभला
रूह की पीड़ा कौन मिटाए

मोर मयूरी नाच चुके सब
रो रो सावन बीता जाए

पीली पड़ गई हरियाली भी
धानी आँचल सरका जाए

देख के उनको हाल अजब है
प्यास बुझे और प्यास न जाए

हुस्न का साक़ी प्यार के सागर
‘तर्ज़’ पिए और गिर गिर जाए

0 comments: